पट्रोलियम कंपनियां ही कर रही है बड़ा खेल,पम्प मालिकों से पूरा पैसा लेकर दे रही है कम तेल,ट्रक अनलोडिंग में कम ही निकलेगी,बून्द-बून्द पेट्रोल और डीजल निकालने के लिए कंपनी द्वारा भेजे ट्रक को ढलान पर खड़ा कर हिलाया डुलाया जाता

DK Goswami : (09838335792)आज एक ऐसा खुलासा होने जा रहा है जो देश सभी पम्प मालिक जहर के घूँट की तरह पी रहे थे लेकिन बेचारे चाह कुछ बोल नहीं पा रहे है | अक्सर जब पम्प पर ट्रक भरकर आती है तो उसमें तेल कई लीटर कम हो जाता है | यहाँ पम्प टैंक की मशीनों में रिफलिंग के दौरान पम्प मालिक बार-बार मिलान करते है लेकिन हताश होकर वो चुप रहने में ही भलाई समझते है |

अगर यकीन नहीं होता तो खुद जाकर किसी भी पम्प का निरिक्षण किया जा सकता है तो पता चलेगा कि जब ट्रक अनलोडिंग में कम ही निकलेगी | बून्द-बून्द पेट्रोल और डीजल निकालने के लिए कंपनी द्वारा भेजे ट्रक को ढलान पर खड़ा कर हिलाया डुलाया जाता है कि कही एक भी लीटर छूटने न पाए|

स्पेशल ड्राइव के बाद भी पेट्रोल पम्पो पर घटतौली की शिकायतें लगातार आ रही है जो साबित करती है कि घटतौली का खेल अभी भी जारी है । और जांच के नाम पर सिर्फ जनता के साथ छलावा किया गया है ।

जांच के नाम पर हुआ बड़े पैमाने पर खेल ।

बीते दिनों एसटीएफ के हत्थे चढ़े चिप घोटाले के मास्टरमाइंड अजय चौरसिया ने पूछताछ के दौरान प्रदेश के 80 प्रतिशत पम्पो पर चिप लगाए जाने की बात कबूल करी । अजय ने ये भी स्वीकार किया कि वो अकेला नही बल्कि उसके जैसे कई अन्य लोग भी इस तरह की चिप लगाने का काम कर रहे । अजय के इस कबूलनामे के बाद ये साफ़ हो गया की प्रदेश के लगभग सभी पम्पो पर घटतौली का खेल खेला जा रहा है लेकिन उसके बाद पेट्रोल पम्पो की जांच करने को चली स्पेशल ड्राइव से एसटीएफ को किनारे कर पेट्रोलियम कंपनी और कांटा बाँट के उन्ही अधिकारियो को जाँच का ज़िम्मा दिया गया जिनके संरक्षण में ही घटतौली का ये सारा खेल खेला जा रहा था ! स्पेशल ड्राइव में नाम मात्र पम्पो को ही कार्यवाही की जद में लिया ! स्पेशल ड्राइव के दौरान भी इन बेईमान अधिकारियो ने अपनी सेटिंग वाले पम्प डीलरों से लाखों रूपये वसूल कर उन्हें जांच में कलीन चिट थमा दी जिसके चलते अभी भी आम उपभोक्ताओं को सही मात्रा में तेल नही मिल रहा और उनके साथ लूट का सिलसिला जारी है ।

टेम्प्रेचर वैरिएशन से पम्प को घाटा लेकिन कम्पनी के अधिकारियो की लाखो की कमायी ।

कंपनी अधिकारियों के संरक्षण में ही तेल के टैंकरों में बड़े पैमाने पर घपलेबाजी की जाती है । कम्पनी डिपो से निकलने वाले हर टैंकर में 150 से 250 लीटर तेल का फर्क टेम्प्रेचर वैरिएशन का आता है । कम्पनी के अधिकारी ये तो स्वीकार करते है कि डिपो में तेल का भण्डारण करने वाले टैंक खुले में लगे है जिसमे भरा तेल धूप की गर्मी से बेहद गरम हो जाता है और फिर यही गरम तेल जब पेट्रोल पंप पर ज़मीन के अंदर लगे टैंक में जाता है तो वहां का तापमान कम होने के चलते 150 से लेकर 250 लीटर तक तेल कम हो जाता है । लेकिन इसके बावजूद तापमान के अंतर से कम होने वाले तेल की भरपायी नही करते क्योंकि टेम्प्रेचर वैरिएशन के इस खेल से रोजाना डिपो में हज़ारो लीटर तेल बचाया जाता है और उसे सेटिंग वाले पम्पो को बेच कर रोजाना पचासों लाख की कमायी होती है ।

बेईमान अधिकारियों से तेल माफिया की है साठगांठ

डिपो के आस पास ही सैकड़ो की तादाद में तेल चोरी की अड्डिया धड़ल्ले से चल रही है । अधिकारी इन अड्डियो के संचालित होने की बात भी स्वीकार करते है लेकिन तेल माफियाओं से साठगांठ होने के चलते इन अवैध अड्डियो के खिलाफ कोई कानूनी कार्यवाही नही करवाते । जिसके चलते डिपो से बाहर आने के बाद टैंकर ड्राइवर सीधा पम्प न जाकर पहले इन अड्डियो पर जाता है और वहां प्रति चैम्बर एक डिब्बा (एक डिब्बे में 25 लीटर तेल ) यानि 100 लीटर तेल बेचने के बाद ही पम्प की रुख करता है । इस बात की जानकारी होते हुए भी कम्पनी के अधिकारी एक्शन इस लिए नही लेते क्योंकि टैंकर ड्राइवर की चोरी में कम्पनी अधिकारियों द्वारा टेम्प्रेचर वैरिएशन की आड़ में करी गयी घपलेबाजी छिप जाती है और तेल चोरी की सारी आयी गयी टैंकर ड्राइवर के सर थोप दी जाती है ।

मोबिल के नाम पर हर साल लाखों का घाटा

पेट्रोल पम्प से मोबिल की रिटेल बिक्री शून्य होने के बावजूद कम्पनी के बेईमान अधिकारियो द्वारा पम्प डीलर को हर साल ज़बरदस्ती हज़ारो लीटर मोबिल आयल खरीदवाया जाता है । और मोबिल न खरीदने पर कम्पनी पेट्रोल डीजल की सप्लाई रोक देती है । ऐसे में पम्प डीलर मजबूर होकर मोबिल खरीदता है और 40 प्रतिशत घाटे के साथ मोबिल विक्रेताओं को बेचता है । ऐसे में हर साल पम्प डीलर को लाखो का घाटा होता है ।

स्पेशल ड्राइव में निशाने पर रहे कम्पनी की नाज़ायज़ बात न मानने वाले डीलर

स्पेशल ड्राइव की आड़ में कम्पनी के बेईमान अधिकारियों ने ऐसे पम्प डीलरों को ही निशाना बनाया जो या तो मोबिल नही खरीद रहे थे या कंपनी से आने वाले टैंकरों में कम तेल आने के खिलाफ लगातार आवाज़ उठा रहे थे । और स्पेशल ड्राइव में उन तमाम पम्प डीलरों को कलीन चिट दे दी गयी जहा घटतौली की शिकायतें आम बात है और रोज़ ही ग्राहकों द्वारा कम तेल मिलने की शिकायते सामने आया करती थी । लेकिन ऐसे पम्प डीलरों को इस लिए कलीन चिट दी गयी क्योंकि वो न तो कंपनी से मिलने वाले कम तेल का विरोध करते है और न ही ज़बरदस्ती दिए जाने वाले मोबिल का । अलबत्ता प्रति लीटर तेल में 10 प्रतिशत घटतौली कर न सिर्फ इस घाटे को पूरा करते है बल्कि खूब कमायी भी करते है ।

स्थानीय स्तर पर भी चढ़ाना पड़ता है चढ़ावा

पम्प डीलर को ज़िला स्तर पर भी कई विभागों के भ्रष्टाचार का शिकार होना पड़ता है । जिसमे अग्निशमन , पुलिस , कांटा बाँट , पूर्ति विभाग आदि शामिल है जिनमे कुछ तो समय समय पर पम्प डीलर का दोहन करते है और कुछ बाकायदा मंथली बेसिस पर वसूली का दबाव बनाते है ।

मौजूदा हालात में पम्प डीलर के लिए असंभव है पूरा तेल देना

सवाल ये है जब मोबिल के नाम पर पेट्रोल पम्प डीलरों को हर साल लाखो रूपये का घाटा कराया जा रहा है और पेट्रोल पम्प डीलरों को कम्पनी के डिपो से ही प्रति टैंकर 150 लीटर से 250 लीटर तक कम तेल मिल रहा है और ऊपर से टैंकर चालक भी 50 से 100 लीटर तेल चोरी कर रहा है तो ऐसे में हर टैंकर पर करीब 300 से 350 लीटर तेल कम मिलने के बाद कोई भी पम्प डीलर अपने ग्राहकों को पूरा तेल कैसे दे सकता है ?

अगर मोदी और योगी सरकार सही मायनो में आम जनता के साथ होने वाली इस लूट को रोकने के लिए गंभीर है तो उन्हें पेट्रोल पम्प डीलरों पर सख्ती से पहले उन्हें 100 प्रतिशत तेल की आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ है अरबो खरबो का घोटाला करने वाले पेट्रोलियम कम्पनी के बेईमान अधिकारियो पर भी कार्यवाही सुनिश्चित करनी होगी !

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